शनिवार, 7 नवंबर 2020

लघुकथा : कहीं ख़ुशी कहीं मायूसी

 

लघुकथा

कही ख़ुशी कही मायूसी  

रेल्वे स्टेशन पर गाडी के रूकते ही बबलू जिद करने लगा । 

मम्मी आईस्क्रीम खाना है । 

माँ ने 50 रुपये का नोट पर्स से निकाल कर हाथ मे थमा दिया ।

" अंकल ! मैगो फ्लेवर आईसक्रीम दिजीए।

आईसक्रीम वाले ने नोट जेब के हवाले किया ।

"मैगो फ्लेवर खतम हो गया है, वनीला, आरेन्ज ले लिजीए।

"नहीं ! मुझे मैगो फ्लेवर ही चाहिऐ ।" 

आईसक्रीम वाला : "आरेन्ज फ्लेवर भी अच्छा है । खा कर देखो राजा ।" 

"ठीक है, दे दो ।" 

खाते ही बबलू बोला "अरे! यह तो एकदम घटिया है।" 

कंधे उचकाकर मुँह बिचकाया और आईसक्रीम डस्टबीन मे फेक दी । 

कचरा बिनने वाले बच्चे की उस पर नजर पड गयी, उसने लपक कर आईसक्रीम उठा ली ।

अब बबलू मायूस था और वह बच्चा खुश।


उदय श्री. ताम्हणे 

भोपाल मध्यप्रदेश भारत