गनीमत है कि बहार में मिल गये लोग।
वर्ना जीने के लिए सात पर्दे गिरा लेते है लोग।।
हम ही नादां थे,जो उनको बिठाया सर आंखो पर।
वर्ना उंचे ओहदे पर, यूं भी पहुंच जाते है लोग।
हमने तो चाहा था, सिर्फ कृपा बनी रहे।
न जाने कैसे, कृपा बरसा लेते है लोग।
अब वो बात न रही, सच्चाई / ईमान की।
"उदय" बात - बात मे झुठला देते है लोग।।
उदय श्री ताम्हणे
