लघुकथा
तपस्या
किसी न किसी को कोई न कोई तो प्यारा लगता ही है।
राजेश्वरी ने फैसला सुना दिया - "मैं शादी करूंगी तो रजनीकांत से ही, किसी और से नहीं।"
"तुम पागल हो गई हो। ऐसा कोई करता है। खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहीं हो।" माँ ने पुन: समझाया।
" माँ ! मैं यकीन के साथ कह सकती हूँ, रजनीकांत की आंखों में अंधेरा है। लेकिन मन उजला है।"
"रजनीकांत को मेरे सहारे की जरूरत है, पापा! वह अवश्य ही फिर से दुनिया देखेगा।"
उदय श्री ताम्हणे
भोपाल मध्यप्रदेश
