मंगलवार, 20 जुलाई 2021

चुनिंदा लघुकथाएं (04) अर्विना

 बूढ़ा नीम 


घर के बाहर द्वार पर बैठा बलबीर नीम की डालियों को  हवा के झोंके से होले होले से हिलते हुए देखकर बीते दिनों की  दिमाग पर पड़ी यादों की परत को.........  परत दर परत उधेड़ने लगा । 

"  बेटे की उम्र  जब छः साल की थी,    पत्नी  चल बसी  ।"

 " मेहनत मजदूरी करके बेटे को बहुत कष्टों से  पाल पोस कर बड़ा किया और समय आने पर अपने बेटे का ब्याह भी बड़े चाव से किया था । "

"मगर कहते हैं कि आदमी की किस्मत उससे एक कदम आगे ही चलती है । "
बहू ने घर में आते ही  बेटे को ना जाने कौन सा पाठ पढ़ाया कि वह  ससुराल में  घर दामाद बनने पर राजी हो  गया।
 "मेरा तो उसे ख्याल तक न आया ।"
"मैं बूढ़ा लकवाग्रस्त अकेला कैसे रहूँगा ? "

"बेटा ने लड़ झगड़ कर अपना  हिस्सा भी बंटवा लिया और   पैसे लेकर चला गया । "

"कुछ दिन तक     पड़ोसियों  ने मेरी  मदद की .... लेकिन यह हुआ कि  रोज रोज कौन करे और आखिर कब तक ,?" 
सभी पड़ोसी ने  मिलकर ‌सरपंच के साथ बैठकर सलाह मशविरा किया ।

"सब की बात सुनकर सरपंच ने कहा एक तरकीब है ।" 

 "एक धोबी का लड़का  मेरी नजर में  है , जिसके माता पिता अभी कुछ दिन पहले  नहीं रहे उसके पास खाने के भी लाले है । इनकी देखभाल में रख देते हैं ।"

 इनके खेत खलिहान की भी देखभाल हो जायेगी उस बेचारे को  भी एक घर मिल जायेगा । 

"सरपंच ने बलबीर से पूछा तुम क्या कहते हो ।" 

"सरपंच जी आप का यह फैसला मेरे बचे कुचे दिनों की शायद किस्मत बदल दे । "
"भगवान पर भरोसा रखो बलबीर ।"
"इसके अलावा मेरे पास कोई चारा भी तो नहीं है ।"

"भूपेंद्र ने आकर मेरे घर खेत और मुझे भी बड़ी अच्छी तरह संभाल  लिया । लेकिन किस्मत  अब भी एक कदम आगे ही  ...आगे  भाग रही थी ।"

" सालों बाद  अचानक बेटा बहू  अपने बच्चों सहित लोट  आया ।" वह 
मुझसे जो  पैसा ले गया  था , ..उस पैसे को  उसके  ससुर ने  शेयर में लगा दिया था ।
 "शेयर  में   पैसा डूबते ही ससुर ने घर से निकाल दिया ।"
 

"बेटा  मुझे तुम्हारी किसी  कहानी पर विश्वास नहीं है ।"

"तुम अब यहां क्या लेने आए हो?"

"पिता जी मुझे क्षमा कर दें । "

"मैं कौन होता हूँ क्षमा देने वाला " 

"क्षमा देने वाला  ऊपर वाला है ।"बलबीर ने इतना कह  कर  मुँह फेर लिया ।
" पिता जी ! एक बात कहूँ  भूपेंद्र की क्या जरूरत है ?
"मैं आ गया  हूँ ।" 
"मुझे पता था तुम ऐसा ही कुछ कहोगे ।"

भूपेंद्र ने सालों से मेरी देखभाल कर रहा  है ,  वह यहीं रहेगा ,   ये बात तुम  कान खोलकर सुन लो ।
 तुम को में डेढ़ ‌बीघा खेत और खलिहान में घर बनाने के लिए जगह देता हूं , तुम वहीं जाकर रहो ।
 "पिता जी , मैं आप का पुत्र हूँ । "
"आप मुझे इस तरह  घर से बेघर कैसे कर सकते हैं  ? "
"बेटा बबूल के वृक्ष से आम की चाहत करना मेरे लिए फिजूल है ।"

आज तुम मुफलिसी में हो इस लिए मेरी शरण में हो कल फिर पैसा आ जाने पर मुझे कब छोड़ दो तुम्हारा क्या ऐतबार ?

"मेरे इस कड़े फैसले को सुनकर बेटा बहू चले गए।"

"दरवाजे पर खड़ा मेरी हम उम्र  नीम का पेड़ खुश हो अपनी डालियां हिला रहा था।" 

 मानो मुझसे कह रहा हो नीम बूढ़ा ही सही अपने औषधिय गुण नहीं  छोड़ता।


अर्विना 
हाउस नं 7 ज्योति किरन सोसायटी ग्रेटर नोएडा